Tuesday, September 14, 2010

कॉमनवेल्थ गेम्स की जान-दिल्ली

देश की राजधानी में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के सफल आयोजन को लेकर शायद ही किसी को शंका न हो। सबके पास इसको लेकर अलग-अलग विचार हैं। अधिकतर को गेम्स के सफल आयोजन को लेकर मन में खटका है। यदि हम ये मान लें कि ऐसी नकारात्मक सोच वाले मुट्ठी भर लोग ही हैं तो हम दुनिया में सबसे अधिक सकारात्मक सोच रखने वाले व्यçक्त होंगे। यदि गेम्स सफल हो जाते हैं (सफल तो होना ही है) तो ये उलझन रहेगी कि सफलता का श्रेय किसे दिया जाए? श्रेय लेने वाले की सूची में गेम्स की आयोजन समिति, केन्द्र और दिल्ली सरकार तथा इसका विरोध करने वाले कुछ लोगों के नाम भी शामिल होंगे।

गेम्स का विरोध करने वालों का नाम इसलिए कि उनके गेम्स के आयोजन विरोधी बयान से आयोजन समिति को नई ऊर्जा मिली। इससे समय पर गेम्स से सम्बंधित कामों को पूरा करने में फायदा हुआ होगा। समिति ने सफल आयोजन कर विरोधियों को करारा जवाब देने के लिए कमर कस ली होगी। इसलिए विरोधियों की भूमिका को नज़रअन्दाज नहीं किया जा सकता।

देश के प्रधानमन्त्री ने खेल के आयोजन स्थल का दौरा कर तैयारियों का जायजा लिया इसलिए यदि गेम्स सफल होते हैं तो केन्द्र सरकार को भी इसका श्रेय दिया जाना चाहिए। प्रधानमन्त्री का गेम्स से कोई सीधा सम्बंध तो नहीं है, फिर भी उन्होंने इसमें रुचि दिखाई, अपना कीमती वक्त निकाला और आयोजन स्थल का दौरा किया। इसके लिए कृतज्ञता तो प्रकट करनी ही चाहिए। भले ही वे अपने फील्ड में असफल रहे हों और उनका अर्थशास्त्र आम आदमी के काम न आया हो। इस पर ध्यान देने की जरूरत नहीं।

दिल्ली सरकार को इस बात का पूरा श्रेय मिलना चाहिए कि उसने गेम्स को सफल बनाने के लिए बहुत कुछ किया। बनागी देखिए, दिल्ली को खूबसूरत और आकर्षक बनाने के लिए कई जगहों पर गड्ढे खुदवा दिए। ताकि उसमें बारिश का पानी जमा हो जाए और डेंगू, मलेरिया तथा चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के मच्छर उनमें बड़ी आसानी से पनप सकें। गेम्स के दौरान आनेवाले मेहमानों को आखिर सौगात में हम क्या देते। इससे ये समस्या भी हल हो गई। इस योजना से खुश होकर मच्छरों के सरदार ने भी दिल्ली सरकार को एक विशेष पुरस्कार देने के बारे में गम्भीरता से विचार कर रहा है।

गेम्स के आयोजन को सफल बनाने के लिए गीत भी लॉन्च किए गए। पहले सिर्फ एक गीत से काम चलाने की योजना थी, लेकिन गीत को लॉन्च करने के बाद लगा कि इसमें थोड़ी कमी रह गई है। इस कमी को पूरा करने के लिए दो और थीम सॉन्ग लॉन्च कर दिए गए। दूसरे थीम सॉन्ग में दिल्ली को जान बताया गया। इस तरह गीत से भी खेलों की तैयारियों में जान डालने की कोशिश की गई। प्रफेशनल सिंगर के साथ-साथ दिल्ली की मुखिया ने भी अपनी थरथराती आवाज में कुल लाइन गाया, ताकि गेम्स की तैयारियों को मजबूती मिल सके।

और अन्त में नंबर आता है आयोजन समिति के अध्यक्ष का, जिन्होंने बड़ी दिलेरी से हेरफेर के आरोपों और नाकामी की बद्दुआ का सामना किया। उन्होंने सभी आरोपों का न केवल जवाब दिया बल्कि जांच के लिए तैयार होने की बात भी कही। उनकी दिलेरी और गेम्स के सफल बनाने के जज्बे को सलाम करते हुए श्रेय देने की सूची में उनका नाम सबसे ऊपर आना चाहिए। इससे उनको हौसला मिलेगा और हमें ओलिंपिक जैसे बड़े खेलों की मेजबानी का मौका दिलाने में भी उनका अनुभव काम आ सकता है। यदि तब कोई बड़ा आरोप लगेगा तो उसे भी वे अपनी दिलेरी से सामना कर सकते हैं। क्योंकि हम धीरे-धीरे ही सही लेकिन आगे ओलिंपिक वाले ही रास्ते पर जा रहे हैं। एशियन और कॉमनवेल्थ के सफल आयोजन के बाद नंबर तो इसी का आएगा।