Friday, March 27, 2009

'कौन हारा घाट' पर दिग्गज

बिहार की राजधानी पटना से महज 10 किलोमीटर दूर स्थित हाजीपुर आधुनिक, ऐतिहासिक और पौराणिक चीजों का अनूठा संगम है। यह शहर वैशाली जिले में आता है, जहां लिच्छिवियों ने विश्व का पहला गणतंत्र स्थापित किया था। महात्मा बुद्ध के शिष्य आनंद के अवशेष का एक हिस्सा हाजीपुर में सुरक्षित रखा गया है। हाजीपुर-पटना के बीच एशिया का सबसे बड़ा सड़क पुल महात्मा गांधी सेतु है, जो गंगा नदी पर बनाया गया है। इसकी लंबाई लगभग साढ़े पांच किलोमीटर है। यह पुल उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ता है। इस शहर को गंडक नदी सारण जिले से अलग करती है। इस तरह यह शहर दो नदियों-गंगा और गंडक के मिलन स्थल पर बसा है। यहीं रेलवे के ईस्ट-सेंट्रल जोन का मुख्यालय है। इन सबसे अलग हाजीपुर केले के लिए भी प्रसिद्ध है।


प्राचीन काल में हाजीपुर का नाम उक्काकला था। यह पटना की ओर से गंगा नदी पार करने के बाद पहला गांव था। इतिहास में इस बात का भी स्पष्ट उल्लेख है कि हाजीपुर में मुगल सम्राट अकबर और बंगाल के उसके व्रिोही अफगान शासक के बीच दो बार वर्ष 1572 और 1574 में युद्ध हुआ था। अंग्रेजों के शासन के समय में हाजीपुर मुजफ्फरपुर जिले का एक छोटा शहर था। इसका वर्तमान नाम इसके संस्थापक हाजी इलियास के नाम पर है।


हाजीपुर के साथ एक किंवदंती भी जुड़ी हुई है। इसके अनुसार एक बार इसके घाट पर गज (हाथी) और ग्राह (मगरमच्छ) के बीच जबर्दस्त लड़ाई कई दिनों तक चलती रही। मान्यता के अनुसार गज भगवान विष्णु का उपासक था। अंत में गज ने अपनी रक्षा के लिए इष्टदेव विष्णु को पुकारा। भक्त की पुकार सुन भगवान विष्णु अवतरित हुए और उन्होंने ग्राह को मार कर अपने भक्त की जान बचाई। यह भी मान्यता है कि गज और ग्राह गंधर्व थे। भगवान विष्णु ने ग्राह को मारकर उसे मुक्ति दी थी। इसके बाद से ही यह घाट 'कौन हारा घाट' के नाम से प्रसिद्ध हो गया।


आजादी के बाद हुए पहले आम चुनाव में यहां से कांग्रेस पार्टी को सफलता मिली। वर्ष 1971 के आम चुनाव तक इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा। लेकिन वर्ष 1977 में कांग्रेस विरोध की आंधी में जनता पार्टी के टिकट पर पहली बार रामविलास पासवान ने हाजीपुर संसदीय सीट से जीत दर्ज की। इससे पहले पासवान यूनाइटेड सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर राज्य विधानसभा के सदस्य भी रह चुके थे। इसके बाद वर्ष 1984 में कांग्रेस ने इस सीट पर पुन: कब्जा कर लिया। लेकिन वर्ष 1989 से 2004 के लगातार छह आम चुनावों में पासवान जीत का दीदार करते रहे हैं। पासवान पहली बार नौवीं लोकसभा में वीपी सिंह सरकार में श्रम एवं कल्याण मंत्री बनाए गए। वर्तमान सरकार में भी हाजीपुर के प्रतिनिधि के रूप में पासवान उवर्रक और इस्पात मंत्री हैं। लगातार सातवीं बार जीत के लिए हाजीपुर से पासवान एक बार फिर मैदान में हैं।

2 comments:

  1. अरे! मगरमच्छ ने पकड़ा था त भगवान जी बचा लिए हथिया को. अगर कौनो नेता पकडे होता तब न देखते कि कैसे बचाते! देखिए न बेचारी जनतवा को.

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